ध्रुव राठी के बारे में मेरे मिश्रित विचार हैं। उसकी कुछ बातें मुझे बहुत पसंद है, और कुछ बातें बहुत खराब लगती है। पहले मैं शुरुआत करूंगा उन बातों से जो मुझे अच्छी लगती है और फिर उन बातों की जो मुझे खराब लगती है।
सकारात्मक
जब ध्रुव राठी राजनीतिक वीडियो नहीं बना रहा होता, उस समय वह ज्ञान देने वाली वीडियो बनाता है (अगर उसके इंटरव्यू वाले वीडियो को नजरअंदाज किया जाए)। उसकी काफी सारी वीडियो से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है।
इस वीडियो से मुझे सीखने को मिला कि म्यूच्यूअल फंड क्या होता है और वो कितने प्रकार के होते हैं।
इस वीडियो से मैने जाना राष्ट्रवादी और समाजवादी का मतलब क्या होता है।
इस वीडियो में उसने बताया कि अपने व्यापार की शुरुआत कैसे की जाती है।
और इस वाले में कि कोई खबर सही है या गलत, कैसे पता लगाया जा सकता है।
इसमे बताया व्हाट्सएप्प फोरवर्ड बिना सोचे समझे करने से क्या परेशानी आ सकती है।
और आज ही उसकी ये वीडियो आई, जिसने बताया कि 2.0 में बताई गई बात (फ़ोन से रेडिएशन निकलता है जिससे पक्षियों को परेशानी होती है) गलत है।
संक्षेप में कहूँ तो वो अलग-अलग विषयों पर लोगों को जागृत करता है।
नकारात्मक
उसे हर जगह भाजपा की आलोचना करनी ही होती है, चाहे किसी भी बारे में बात कर रहा हो।
ये हैं ध्रुव राठी की आखिरी 25 वीडीयो।
25 में से 21 वीडियो नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हैं। बात कही से शुरू हो, हमेशा मोदी की आलोचना पर ही खत्म होती है।
जैसे ये थी केरल बाढ़ के ऊपर बानी हुई वीडियो।
केरल में बाढ़ आई, जिससे बहुत बड़ा नुकसान हुआ।
कई राज्यों की सरकार ने इसके लिए चंदा दिया।
लेकिन ये बाढ़ आई क्यों?
क्योंकि किसी ने कुदरत की रक्षा नहीं की। अभी भी अनुमान है कि पश्चिम घाट में भी ऐसी ही एक बाढ़ आ सकती है।
लेकिन मोदी सरकार को कोई परवाह नहीं।
अरे परवाह तो किसी को भी नहीं! तो सिर्फ मोदी पर ही क्यों निशाना साधना?
लेकिन फिर भी, जैसा कबीर दास जी ने कहा था,
निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय।
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।।
इसलिए मुझे लगता है इसके विश्लेषण में कुछ गलत नहीं है। अब अगर हमें भारत को दुनिया का सबसे बेहतरीन देश बनाना है, तो हमें हर एक पहलू पर सही रहना होगा ताकि हमारी आलोचना न हो सके।

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